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जल, जंगल को बचाता वी.एल.स्याही लौह हल

उत्तराखण्ड का ग्रामीण समाज बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है जिस खेती ,बागवानी, पशुपालन के सहारे सदियों से गुजारा होते आया था आज किसी के लिए भी अनुकूल परिस्थिति नहीं रही. पशुओं के लिए साल भर घास, चारा नहीं है, खेती बागवानी के लिए जरूरी मौसमी दशाएँ नहीं हैं. किसी तरह मौसम से लङते हुए कुछ पैदा किया भी जाता है तो बंदर ,सुअर ,लंगूर की फौज परेशान कर रही है कोई कैसे हिम्मत जुटाए? मगर महज़ तीन दशक पहले तक ऐसा नहीं था हम लोग विश्व के आत्मनिर्भर ग्रामीण समाजों में से अग्रणी समाजों में से एक हुआ करते थे। तेल, मसाले ,दुग्ध पदार्थ, अनाज हर मामले में हम आत्मनिर्भर हुआ करते थे.



 पर अचानक ऐसा क्या हुआ? कि हम पलायन करने को विवश हो गये. गौर से देखें तो पायेंगे कि हम खेती, बागवानी, पशुपालन के आधार मिश्रित प्रजाति जंगलों को सहेज कर नहीं रख पाये ।सैकड़ों साल पहले जब भी हमारे पूर्वजों ने कोई गांव बसाया तो यही देखा कि पीने के लिए पानी हो और पशुओं के लिए चारा, घास देने के लिए मिश्रित जंगल हो. बांज आदि चौङी पत्ती प्रजाति के जंगलों नें हमें साल भर पानी दिया, हमारे घट चलाये और जानवरों के लिए घास, चारे की व्यवस्था दी. देखा जाये तो इन्हीं जंगलों नें हमारी कई पीढ़ियों को पाला पोसा. मगर हम यह नहीं देख पाये कि जंगलों के अनियंत्रित व अवैज्ञानिक दोहन के दुष्परिणाम भी हमें झेलने पङेंगे.



 आज भी जहाँ-जहाँ मिश्रित जंगल हैं उन इलाकों में खेती ,बागवानी ठीक ठाक है. वन्य जीवों के आक्रमण भी कम हैं मगर जो इलाके अपने जंगलों की रक्षा नहीं कर पाए वो हर तरह से परेशान हैं. यदि हमें बचे-खुचे जंगलों से हवा पानी लेनी है तो अब बातें छोङकर काम करना होगा. सबसे पहले जंगलों पर ग्रामीणों की निर्भरता कम करनी होगी उनहें सही विकल्प देकर ही जंगलों को बचाया जा सकता है. वी .एल .स्याही हल जंगलों को बचाने में कारगर सिद्ध हो रहा है यदि उत्तराखण्ड से लगाव रखने वाला हर व्यकित इस हल के प्रचार-प्रसार में सहयोग दे व हर किसान तक लौह हल दिया जा सके तो हम कुछ ही समय में हर वर्ष कट रहे लाखों पेङों को बचा सकते हैं ।हर साल लाखों करोड़ों रूपये खर्च कर संदिग्ध सफलता वाले पौधरोपण को कुछ समय रोककर यदि इसी धन से गरीब ग्रामीणों को गैस कनैक्शन दिये जायें तो जंगल आराम से बचाये जा सकते हैं.




लेखक:-  श्री गजेंद्र कुमार पाठक (स्याही देवी विकास समिति. शीतलाखेत के बैनर तले वर्ष २००३-४ से जंगल बचाओ जीवन बचाओ अभियान चला रहे हैं. और वी.एल.स्याही लौह हल को उत्तराखंड में हर किसान तक पहुंचने की मुहीम चला रहे है)

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